Tuesday, June 14, 2011

कभी महक की तरह हम गुलू से उड़ते हैं,
कभी धुए की तरह हम पर्वतो से उड़ते हैं,
यह कैंचिया हममे ख़ाक रोकेंगे,
की हमं परौ से नहीं, हौसलों से उड़ते हैं.

2 comments:

  1. Nice one Vinay. Keep up the good work!!

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  2. अच्छा है .... और भी बेहतर ...और भी परिपक्व लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभेच्छाएं ! < सागर >

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